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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न - निर्वाचन तंत्र

 

प्रश्न 1. कौन-सा प्राधिकरण भारत के राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचन आयोजित करता है?

उत्तर : भारत निर्वाचन आयोग

भारत के संविधान के अनुच्छेकद 324(1) के अन्तर्गत, भारत निर्वाचन आयोग के पास अन्यों के साथ-साथ भारत के राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति के पदों के निर्वाचन आयोजित करने के संचालन, निदेशन और नियन्त्रण की शक्ति निहित है। विस्तृत उपबन्ध राष्ट्रपतीय और उपराष्ट्रपतीय निर्वाचन अधिनियम, 1952 व उसके अधीन बनाए गए नियमों के अन्त र्गत किए गए हैं।

प्रश्न 2. कौन-सा प्राधिकरण संसद के निर्वाचन आयोजित करता है?

उत्तर : भारत निर्वाचन आयोग

इसी अनुच्छेद 324 में, संसद के दोनों सदनों के निर्वाचनों के संचालन, निदेशन और नियन्त्रण की शक्तियां आयोग के पास निहित हैं। विस्तृत उपबन्ध लोक प्रतिनिधित्व‍ अधिनियम, 1951 तथा उसके अधीन बनाए गए नियमों के अन्तंर्गत किए गए हैं।

प्रश्न 3. कौन-सा प्राधिकरण राज्य् विधान सभा निर्वाचन-क्षेत्रों और विधान परिषदों के निर्वाचन आयोजित करता है?

उत्तर : भारत निर्वाचन आयोग

अनुच्छेऔद 324(1) में, आयोग के पास राज्य विधान मंडल के दोनों सदनों के निर्वाचनों के संचालन, निदेशन और नियन्त्रनण की शक्तियां भी निहित हैं। विस्तृत प्रावधान लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 व उसके अधीन बनाए गए नियमों के अन्तर्गत किए गए हैं।

प्रश्न 4. कौन-सा प्राधिकरण निगमों, नगरपालिकाओं व अन्य स्था्नीय निकायों के निर्वाचन आयोजित करता है?

उत्तर : राज्य निर्वाचन आयोग (एस ई सी)

प्रत्येिक राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के लिए संविधान (73वां और 74वां) संशोधन अधिनियम, 1992 के अधीन गठित राज्य निर्वाचन आयोग के पास निगमों, नगरपालिकाओं, जिला परिषदों, जिला पंचायतों, पंचायत समितियों, ग्राम पंचायतों व अन्यल स्थानीय निकायों के निर्वाचन आयोजित करने की शक्तियां निहित हैं। वे भारत निर्वाचन आयोग के नियन्त्र ण से मुक्त हैं।

प्रश्न 5. निर्वाचन आयोग की वर्तमान संरचना क्याा है?

उत्तर : तीन सदस्य निकाय

इस समय, भारत निर्वाचन आयोग तीन सदस्यै निकाय है जिसमें एक मुख्य निर्वाचन आयुक्ता व दो निर्वाचन आयुक्त हैं।

प्रश्न 6. क्या निर्वाचन आयोग प्रारम्भ से बहु-सदस्य निकाय रहा है?

उत्तर : नहीं।

यह प्रारम्भ से बहु-सदस्य निकाय नहीं था। जब 1950 में इसकी स्थापना हुई तो यह एक सदस्य‍ निकाय था और 15 अक्तूबर, 1989 तक इसमें केवल एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त था, 16 अक्तूबर, 1989 से 01 जनवरी, 1990 तक यह तीन सदस्यय निकाय बना जिसमें आर.वी.एस. पेरी शास्त्री (मुख्य निर्वाचन आयुक्त) और एस.एस. धनोआ और वी.एस. सेगल निर्वाचन आयुक्तू थे। 02 जनवरी, 1990 से 30 सितम्बर, 1993 तक, यह एक सदस्य आयोग था और पुन: 01 अक्तूबर, 1993 से यह तीन सदस्य् आयोग बना।

प्रश्न 7. वेतन और भत्तों इत्यादि के सम्बन्ध‍ में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की क्या हैसियत है?

उत्तर : उच्च्तम न्यातयालय के न्याेयाधीशों के समतुल्य।.

मुख्यत निर्वाचन आयुक्तल और दोनों निर्वाचन आयुक्तों को भारत के उच्चातम न्याधयालय के न्यायाधीशों के सममूल्य‍ पर वेतन एवं भत्ते मिलते हैं जैसा कि मुख्य् निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य निर्वाचन आयुक्त (‍सेवा की शर्तें) नियम, 1992 में उपबंधित किया गया है।

प्रश्न 8. मुख्य निर्वाचन आयुक्त की कार्यालयावधि क्या है? क्या यह निर्वाचन आयुक्तों से भिन्न होती है?

उत्तर : मुख्य निर्वाचन आयुक्तय या निर्वाचन आयुक्त अपना कार्यभार ग्रहण करने की तारीख, से 6 वर्ष तक की अवधि के लिए पद धारण करेंगे। तथापि, जहां मुख्य निर्वाचन आयुक्त या निर्वाचन आयुक्तअ उक्तप छह वर्ष की अवधि के समापन से पहले पैंसठ वर्ष की आयु के हो जाते हैं, वह उसी तिथि को जब वे पैंसठ वर्ष की आयु के होते हैं, को अपना पद रिक्त कर देंगे।

प्रश्न 9. जब आयुक्त एक बहु-सदस्यीदय आयोग बन जाते हैं, तो निर्णय किस प्रकार लिए जाते हैं, बहुमत द्वारा या सहमति द्वारा?

उत्तर : मुख्य निर्वाचन आयुक्त या अन्य आयुक्त (सेवा की शर्तें) संशोधन अधिनियम, 1993 की धारा 10 को नीचे उद्धृत किया गया है:-
(1) निर्वाचन आयोग सर्वसम्मणत निर्णय द्वारा अपने कार्यों के निष्पादन के लिए प्रक्रियाओं का विनियमन करने के साथ-साथ अपने कार्यों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अपने निर्वाचन आयुक्तों के बीच आबंटित करता है।
(2) उप-धारा (i) में यथा उपबंधित निर्वाचन आयोग के सभी कार्य, यथासंभव रूप से, सर्वसम्मति से किए जाएंगे।
(3) उप-धारा (ii) के उपबंधों के अध्यवधीन, यदि मुख्यु निर्वाचन आयुक्त् और अन्ये निर्वाचन आयुक्त किसी मामले पर एकमत नहीं हैं तो ऐसे मामलों पर बहुमत की राय के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।

प्रश्न 10. मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति कौन करता है?

उत्तर : राष्ट्रपति।

भारत के संविधान के अनुच्छेयद 324(2) के अधीन, भारत के राष्ट्रपति को मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तोंे को नियुक्त करने की शक्तियां दी गई है।

प्रश्न 11. निर्वाचन आयुक्तों की संख्या कौन निर्धारित करता है? (मुख्य निर्वाचन आयुक्त के अलावा)

उत्तर : राष्ट्रपति।

अनुच्छेद 324(2) में, भारत के राष्ट्रपति को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के अलावा निर्वाचन आयुक्तों की संख्या समय-समय पर निर्धारित करने के लिए भी सशक्त बनाता है।

प्रश्न 12. राज्य में निर्वाचन कार्य का पर्यवेक्षण कौन करता है?

उत्तर :मुख्य निर्वाचन अधिकारी(सीईओ)

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 20 के साथ पठित, लोक प्रतिनिधित्वक अधिनियम, 1950 की धारा 13क के अनुसार, राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के मुख्यि निर्वाचन अधिकारी, राज्य/संघ राज्य् क्षेत्र में निर्वाचन कार्य का पर्यवेक्षण करने के लिए प्राधिकृत हैं किंतु यह निर्वाचन आयोग के समग्र अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण के अध्य धीन होगा।

प्रश्न 13. मुख्य निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति कौन करता है?

उत्तर : भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई)

भारत निर्वाचन आयोग किसी राज्य/संघ शासित क्षेत्र की सरकार के अधिकारी को मुख्यि निर्वाचन अधिकारी के रूप में नामित या पदाभिहीत करने के लिए उस राज्य सरकार/संघ शासित क्षेत्र के प्रशासन से परामर्श के पश्चा त ही ऐसा करेंगे।

प्रश्न 14. जिले में निर्वाचन कार्य का पर्यवेक्षण कौन करता है?

उत्तर : जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) लोक प्रतिनिधित्वि अधिनियम, 1950 की धारा 13क के अनुसार जिला निर्वाचन अधिकारी मुख्य् निर्वाचन अधिकारी के अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण की शर्त के अधीन जिले में निर्वाचन कार्य का पर्यवेक्षण करते हैं।

प्रश्न 15. जिला निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति कौन करता है?

उत्तर :भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई)

भारत निर्वाचन आयोग, राज्य सरकार के परामर्श से राज्य सरकार के एक अधिकारी को जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में नामित या पदनामित करता है।

प्रश्न 16. किसी भी संसदीय या विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र में निर्वाचनों के संचालन के लिए कौन जिम्मेदार होता है?

उत्तर :

रिटर्निंग अधिकारी (आरओ)

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 21 के अनुसार एक संसदीय या विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के रिटर्निंग अधिकारी संबंधित संसदीय या विधान सभा निर्वाचन-क्षेत्र में निर्वाचनों के संचालन के लिए उतरदायी होते हैं।

प्रश्न 17. रिटर्निंग अधिकारी को कौन नियुक्त करता है?

उत्तर :भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई)

भारत निर्वाचन आयोग प्रत्येक विधान सभा और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के लिए राज्य सरकार/संघ राज्य–क्षेत्र प्रशासन के परामर्श से सरकार या स्थानीय निकाय के एक अधिकारी को रिटर्निंग अधिकारी के रूप में नियुक्ते या पदनामित करता है। इसके अतिरिक्त, भारत निर्वाचन आयोग रिटर्निंग अधिकारी के निर्वाचनों के संचालन के संबंध में उनके कार्यों के निष्पादन में मदद करने के लिए प्रत्येक विधान सभा और संसदीय निर्वाचन-क्षेत्रों के लिए एक या अधिक सहायक रिटर्निंग अधिकारियों की नियुक्ति भी करता है।

प्रश्न 18. संसदीय या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए निर्वाचक नामावलियां तैयार करने के लिए कौन उत्तरदायी है?

उत्तर : निर्वाचक रजिस्ट्रीणकरण अधिकारी (ईआरओ)

संसदीय/विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए निर्वाचक नामावलियां तैयार करने के लिए निर्वाचक रजिस्ट्री करण अधिकारी उत्तरदायी होते हैं।

प्रश्न 19. मतदान केन्द्र् पर मतदान का कौन संचालन करता है?

उत्तर :पीठासीन अधिकारी।

पीठासीन अधिकारी मतदान अधिकारियों की सहायता से मतदान केन्द्र पर मतदान का संचालन करते हैं।

प्रश्न 20. निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी की नियुक्ति कौन करता है?

उत्तर : लोक प्रतिनिधित्वक अधिनियम, 1950 की धारा 13ख के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, राज्य/संघ राज्य्-क्षेत्र सरकार के परामर्श से सरकार या स्थानीय निकायों के एक अधिकारी को निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के रूप में नियुक्ते करता है। इसके अतिरिक्तं, भारत निर्वाचन आयोग निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी की निर्वाचक नामावलियों की तैयारी/पुनरीक्षण के मामले में उनके कार्यों के निष्पािदन में सहायता पहुंचाने के लिए एक या अधिक सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की नियुक्ति करता है।

प्रश्न 21. पीठासीन अधिकारियों और मतदान अधिकारियों की नियुक्ति कौन करता है?

उत्तर :जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ)

लोक प्रतिनिधित्वि अधिनियम, 1951 की धारा 26 के अंतर्गत जिला निर्वाचन अधिकारी पीठासीन अधिकारियों और मतदान अधिकारियों को नियुक्ती करते हैं। संघ राज्य6-क्षेत्रों के मामले में, ऐसी नियुक्तियां रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा की जाती हैं।

प्रश्न 22.प्रेक्षकों की नियुक्ति कौन करता है?

उत्तर :भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई)

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 20ख के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग संसदीय और विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों के लिए सरकार के अधिकारियों को प्रेक्षकों (सामान्य प्रेक्षकों और निर्वाचन व्यय प्रेक्षकों) के रूप में नियुक्त करता है। वे ऐसे कार्य निष्पादित करते हैं जो उन्हें आयोग द्वारा सौंपे जाते हैं। पूर्व में, प्रेक्षकों की नियुक्ति आयोग की परिपूर्ण शक्तियों के अंतर्गत की जाती है। परन्तु, वर्ष 1996 में लोक प्रतिनिधित्वय अधिनियम, 1951 में किए गए संशोधन के साथ ये अब सांविधिक नियुक्तियां हैं। वे सीधे आयोग को रिपोर्ट करते हैं।

 
 
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